Humnasheena

हम नशीना, जब तेरी नज़रें मिली …..

हम नशीना
जब तेरी नज़रें मिली
जानेजाना
क्या अदाएँ तेरी
चुलबुली आँखें
क्या करूं मेरी जान
क़रीब आ जा
न कर मुझे परेशान

तुम जो चल रही हो हंस के
मैं न खाऊँ धोका अब के
चाहे, चाहे जितना भी जला लो
सुन लो, न जलूँगा मैं कसम से

जब चले वो साथ-साथ
रूठ के, अदा से, ज़ुल्फ को लहरा के
जब उसे कहना हो तो
चुप रहे, चुप ही रहे, फिर कहे “रहने दो न!”
हम नशीना
जब तेरी पलकें झुकी
जानेजाना
ये अदाएँ तेरी
खेलती है
ये नशीली आँखें
छेड़ती है
धड़कनों को मेरी

तुम जो चल रही हो हंस के
मैं न खाऊँ धोका अब के
चाहे, चाहे जितना भी जला लो
सुन लो, न जलूँगा मैं कसम से

जब चले वो साथ-साथ
रूठ के, अदा से, आँखों को फिरा के
जब उसे कहना हो कुछ तो
चुप रहे, चुप ही रहे, और कहे “बस, क्यों कहू?”

जान मेरी रूठे जब
जी करे हो जाम अपने हाथों में
और फिर ऐसा लगे
करे कोई हसीना बाहर से इशारे

 

[Music: Milin
Lyrics: Farooque Rehman]

 

कुछ प्यार से अब यार चल

जाने कहाँ सब चले जा रहे
वक्त के चक्कर चलते ही रहे
जाना होगा छोड़ के सबसे दूर

सबको अगन ही अगन लगी है
फड़फड़ाती ज्वालाएँ जगीं हैं
जानो तुम वो रहेंगी हमेशा ज़रूर

कुछ प्यार से अब यार चल
बस चैन से दिलदार चल
शम्मा की तरह, नदिया की तरह

(जैसे) भीनी-भीनी हवा चले
हलके-हलके सबको छू ले
धीमे-धीमे शम्मा की तरह

[Music]

कुछ प्यार से अब यार चल
बस चैन से दिलदार चल
शम्मा की तरह, नदिया की तरह

(जैसे) भीनी-भीनी हवा चले
हलके-हलके सबको छू ले
धीमे-धीमे शम्मा की तरह

लगता है जैसे रहना यहाँ है कुछ और
प्यार से दिल भरना है कुछ और
क्या ऐसे ही गुज़रेगी कुछ और
(क्या) दर्द छिपेगा हँसी में, (ओ) मेरे यार

कुछ प्यार से अब यार चल
बस चैन से दिलदार चल
शम्मा की तरह, नदिया की तरह

(जैसे) भीनी-भीनी हवा चले
हलके-हलके सबको छू ले
धीमे-धीमे शम्मा की तरह

जाने कहाँ सब चले जा रहे
वक्त के चक्कर चलते ही रहे
जाना होगा छोड़ के सबसे दूर

सबको अगन ही अगन लगी है
फड़फड़ाती ज्वालाएँ जगीं हैं
जानो तुम वो रहेंगी हमेशा ज़रूर

[Music]

[Music: Milin
Lyrics: Tushar Bhatia]

 

जाना कहाँ है

जाना कहाँ है
खींचे है क्या मुझे
गिरना, न गिरना
है कैसा डर मुझे

जाना कहाँ है
कोई तो दे बता
क्यों ये झिझकसी
क्या सुनूँ, क्या पता
क्या-क्या ज़िंदगी देगी मुझको – यही सोच बस चलती रही
इसी सोच में क्या-क्या ग़वाया – इसका शायद पता नहीं
बात-बात मे, इसी सोच मे, मन कितना थकता जाए
जाने क्यों ज़िंदगी ने खुशियों के संग ग़म पाए

सोच-सोच में, झिझक-झिझक में
कोशिशों में ही गुज़र रही
वक़्त से कदम मिलाते ही रहने में ही अपनी बसर हुई

 

जाना कहाँ है
खींचे है क्या मुझे
गिरना, न गिरना
है कैसा डर मुझे

जाना कहाँ है
कोई तो दे बता
क्यों ये झिझकसी
क्या सुनूँ, क्या पता
आँख खुले, दिन निकले रोज़, पर मन चाहा सब हो ना हो
जो बीत गई, सो बीत गई, कहना है जिनको कहने दो
आँख खुले जब दिन निकले, खिड़की से किरने छन्ती रहे
काश वैसे ही उजली-उजली सी मेरी उम्मीदें बनी रहे

संभल-संभल के, बच-बच के
अब चलना क्या, मेरे सरकार
अपनी कर लो, अपनी सुन लो
फिक्रें कल की सब छोडो यार

जाना कहाँ है
खींचे है क्या मुझे
गिरना, न गिरना
है कैसा डर मुझे

जाना कहाँ है
कोई तो दे बता
क्यों ये झिझकसी
क्या सुनूँ, क्या पता

क्या-क्या ज़िंदगी देगी मुझको – यही सोच बस चलती रही
इसी सोच में क्या-क्या ग़वाया – इसका शायद पता नहीं
बात-बात मे, इसी सोच मे, मन कितना थकता जाए
जाने क्यों ज़िंदगी ने खुशियों के संग ग़म पाए

सोच-सोच में, झिझक-झिझक में
कोशिशों में ही गुज़र रही
वक़्त से कदम मिलाते ही रहने में ही अपनी बसर हुई

[Music: Milin
Lyrics: Tushar Bhatia]

 

बाहों में बाहें डालें

बाहों में बाहें डालें
चलना ज़रा संभलके, सुन यारा
रस्ते में आते-जाते
पेहचान लेगा तुमको, कोई यहाँ

आँखों से ज़ाहिर है
सब दिल की बेताबी
ये छुप नहीं सकती

बढ़ती ही जाती है
ये प्यास जीवन की
मिट कर नहीं मिटती

[Music]

इक मौज, इक किनारा
दोनो को दिल पुकारा, प्यार से
इसकी भी आरज़ू हैं
उसकी भी जुस्तजू है, क्यूं भला

ये कैसे रिश्तें हैं,
ये कैसे नातें हैं
जाना नहीं कोई

ये कैसी कसमें हैं
ये कैसी रस्में हैं
समझा नहीं कोई

ये प्यार क़ैदियो-सा
लगता है फिर भी प्यारा, सुन यारा
उल्टे अगर जो बाज़ी
क्या कर पाओगे गवारा, कहो यारा

इक है शोहर तेरा
इक प्रेमी का फ़ेरा
मेहफिल अजब-सी है

इस राह से आगे
क्या हो ख़ुदा जाने
मंज़िल अजब-सी है

[Music]

[Music: Milin
Lyrics: Ibrahim Ashq]

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